गुरुवार, 4 मार्च 2010

क्या ब्लागवाणी या चिट्ठाजगत में हमारी रैंकिंग क्या है, इसी से हम अच्छे या बुरे लिक्खाड़ माने जाएंगे?

आज एक नया सवाल
क्या ब्लागवाणी या चिट्ठाजगत में हमारी रैंकिंग क्या है, इसी से हम अच्छे या बुरे लिक्खाड़ माने जाएंगे।

हमें लगता है कि हम एक-दूसरे को नीचा दिखाने का प्रयास क्यों करें? विचारों का सम्मान होना चाहिए, व्यक्ति का नहीं। व्यक्ति बेहतर विचार से महान होता है। वैसे आपकी राय क्या है?

25 टिप्‍पणियां:

Mohammed Umar Kairanvi ने कहा…

आप अपने विचारों से अच्‍छे माने जायेंगे, रैंकिंग तो अधिकतर मक्‍कारी का खेल है, मेरी राय भी यही है कि ''व्यक्ति बेहतर विचार से महान होता है।''

बेनामी ने कहा…

JHA JI BLOGVANI KO KHOLKAR DEKHIYE TEESRE NUMBAR PAR GADHE RAMPYARE DIKHEGE .AISE NAMOONO KO DEKHKAR SAMJH JAAIYE RANKING KA KYA HAL HAI .

संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari ने कहा…

हॉं जी हॉं, हम इसी से अच्छे या बुरे लिक्खाड़ माने जाएंगे. इसके लिए जुगत लगायेंगें, दोस्‍तों से चटका लगवायेंगें और नियम से पोस्‍ट लगायेंगें. विषय तो ढेरों हैं, सुबह उठ कर ब्रश किया एक पोस्‍ट, इसमें हम ब्रश और पेस्‍ट के संबंध में चार लाईना तो लिख ही सकेंगें फिर दूसरे दिन टायलेट गया ये हुई दूसरी पोस्‍ट(इस पर नाईस कमेंट तो अवश्‍य आयेगा), तीसरे दिन बाथरूम में नहाया-तीसरी पोस्‍ट, चौथे दिन ...., पांचवे दिन .... ऐसे ही विषयों पर धका धका पोस्‍ट पेले जाओ और सक्रियता ठेले जावो. लिंक का भी जुगाड करते जाओ. आखिर हम लिक्खाड़ जो हैं.

संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari ने कहा…

क्षमा करें झा साहब उपर की टिप्‍पणी, भडास थी. मैं आपके विचारों का सम्मान होना चाहिए, व्यक्ति का नहीं। व्यक्ति बेहतर विचार से महान होता है। से सहमत हूँ.

Ratan Singh Shekhawat ने कहा…

चिट्टाजगत की रेंकिंग में किसी ने अच्छा लिखा या बुरा लिखा इससे कोई फर्क नहीं पड़ता और न ही ये ब्लॉग पर ट्राफिक के आधार पर रेंकिंग करते है | चिट्टाजगत की रेंकिंग महज सक्रियता रेंकिंग है कि हिंदी ब्लॉग जगत में कोई कितना सक्रीय है |
अच्छे बुरे लेखन की कोई भी सिस्टम रेंकिंग कैसे कर सकता ?
जहाँ तक विचारों के सम्मान की बात है - हमेशा अच्छे विचारों का ही सम्मान होता आया है और आगे भी होता रहेगा | इतिहास गवाह है कि अच्छे विचारों वाले व्यक्ति ही महानता की श्रेणी को प्राप्त हुए है |

VIJAY TIWARI " KISLAY " ने कहा…

"क्या ब्लागवाणी या चिट्ठाजगत में हमारी रैंकिंग क्या है, इसी से हम अच्छे या बुरे लिक्खाड़ माने जाएंगे?"
बात तो यही समझ में आती है, क्योंकि यदि ऐसा न होता तो इन धुरंधर लिक्खाडों में से अनेक चिटठाकार रचनाएँ बिना पढ़े .. वाह, बहुत अच्छा , बढ़िया, बधाई, सुन्दर आदि शब्द न लिखते...ये शब्द ब्लॉग जगत में इतने आम हो गए हैं कि इन्हें देखते ही समझ में आ जाता है कि टिप्पणीकार ने आपकी रचना को कितना महत्त्व दिया है, ये शब्द आज " कचरे " जैसे लगने लगे हैं.. इसी तरह टीप देने का एक तरीका और है कि आप रचना को बिना पढ़े उस रचना पर आई टिप्पणियों के आधार पर ही अपने विचार लिख दो. आपकी रेंकिंग तो बढ़ ही जायेगी भले ही प्रबुद्ध पाठक आपकी धूर्तता को समझकर चुप रहे. अरे भाई आप किसे बेवकूफ बना रहे हैं , दूसरों को या खुद अपने को... भाई जी जब तक आप कुछ पढोगे नहीं तो ज्ञान का भंडार कहाँ बढ़ा पाओगे. या फिर अपने ही कुए के पंडित मंडूप बन के अपने को बहादुर समझते रहो और अपनी रेंकिंग का ताबीज गले में लटका के फोटो खिचवा लो.

माफ़ कीजिये , मुझे ऐसा ही लगा, जिसे मेरी बात बुरी लगे तो मन मानूंगा कि उसे ये गंभीर बीमारी लगी होगी.

- विजय

Alpana ने कहा…

Ratan ji ki baat se sahmat .
ranking matr--skriyta rank hain ki kaun kitni frequent post likh raha hai..
--------------
[@Sanjeev ji--इस पर नाईस कमेंट तो अवश्‍य आयेगा--really nice!]
---व्यक्ति बेहतर विचार से महान होता है।

Suman ने कहा…

nice

Udan Tashtari ने कहा…

रतन जी का कथ्य सही है...

बेनामी ने कहा…

आप फिर एक नया मसाला उठा लाये,कोई गम्भीर विषय लेखन के लिए नहीं है आपके पास.

tarannum ने कहा…

@prbhat ji
what mr ratan ,sanjeev said is right here so many people are so much addicted to bloging seems they havent any out side world.sme of them posted everyday,some of them are having 3 -4 blogs.two days back i was seeing a gentalman was writing against the editor of "nayi duniya"with in hour he posted another post in his second blog showing that his post is appear in this news paper .poor fellow.
another some one is making call to every bloggar ,someone is mailing everyone.
yesterday one another lady who is mailing to every blogger aor on chat ask to increase her pasand is writing on one blog that she is fed-up of blooging.
they are really hippocrates.
what mr mehta said he said the quality and content of hindi bloging is poor .
i think he was right.

Dr. Smt. ajit gupta ने कहा…

सबसे प्रमुख बात है अच्‍छे विचारों वाली पोस्‍ट। हम हमेशा इन्‍हें ही ढूंढते हैं, कभी भी रेंकिग पर ध्‍यान नही देते।

प्रभात गोपाल झा ने कहा…

बेनामी महाराज, मसाला लेकर क्या चाट और पकौड़ी बनाना है। जो मन में सवाल उठता है डाल देते हैं। लेकिन आप बेनामी होकर क्यों हर बार आ जाते हैं?

सलीम ख़ान ने कहा…

आप अपने विचारों से अच्‍छे माने जायेंगे, रैंकिंग तो अधिकतर मक्‍कारी का खेल है, मेरी राय भी यही है कि ''व्यक्ति बेहतर विचार से महान होता है।''

बेनामी ने कहा…

लोंगो को, जमा-जुमा चार दिन आये नहीं हुआ ब्लॉग -जगत में ,बकवास पोस्ट लिख कर क्यों आगे बढना चाहते हैं.

;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;
आप तो खुद रेटिंग के चक्कर में हो,; दुसरे को kya ज्ञान दे रहे हो ;'

बेनामी ने कहा…

upar vali hmari yh slah post ke malik ko hai;

अजय कुमार झा ने कहा…

प्रभात जी ,
सबसे पहली बात तो ये कि जैसा कि टिप्पणियों में कह भी दिया गया है कि ब्लोगवाणी की कोई रैंकिंग नहीं है ..यदि पहले पन्ने पर दिखने वाली पोस्ट सूची की बात कर रहे हैं तो उसका आधार सिर्फ़ पढी गई, पसंद की गई और टिप्पणी की गई पोस्टों को दिखाना होता है और चिट्ठाजगत में तो रैंकिंग ..सक्रियता क्रम है न कि ..अच्छा या बुरा ब्लोग ..ब्लोग्गर जैसा । मगर यकीनन यदि सिरे से कोई आंख मूंद कर ये कहता है कि कुत्ते बिल्ली वाली पोस्टें ही ऊपर दिखाई देती हैं तो वो या तो खुद ही भ्रम में है या फ़िर अपनी भडास निकाल रहा है ..क्योंकि पोस्ट चाहे कुत्ते बिल्ली पर हो या फ़िर किसी बडे ही गंभीर विषय पर उसका जो भी अच्छा बुरा हश्र होता है या शायद कि होते हुए दिखता है ..वो भी हम आप जैसे पाठकों के कारण ही तो है ..

अब रही बात तरन्नुम जी की ,
मैं पहले भी आपकी टिप्पणियां पढ चुका हूं और जान चुका हूं कि आप क्या और किसे और क्यों कहना चाहती हैं ..आलोक मेहता जी के हिंदी ब्लोग्गिंग को गलियाते हुए आलेख पर विरोधस्वरूप मैंने ही लिखा था और ये भी सच है कि मेरी कुछ पोस्टों को समाचार पत्र में प्रकाशित होने वाली पोस्ट भी मेरी ही थी ..मगर लिखा मैंने इस मंतव्य से था कि अखबार और उनका नजरिया ब्लोग्स को लेकर ही कितना अलग है ..यही बात मैंने आलोक मेहता जी के आलेख के विरोध वाले पोस्ट पर लिखी थी ..मगर क्या किया जाए कि आपने उसे वैसे ही देखना चाहा ..जैसा आप चाहती थीं ...और हो भी क्यों न आखिर हिंदी ब्लोग्गिंग में आपकी लिखी गई एक मात्र पोस्ट जो शायद एक पूरी पंक्ति की भी नहीं है ..के बडे योगदान के बाद यदि आप भी आलोक मेहता से इत्तेफ़ाक रखती हैं ...तो इसमें मुझे कोई आश्चर्य नहीं है ..उम्मीद है कि भविष्य में ..आलोक मेहता जी की तरह आप भी को आईना दिखाता लेख पाठकों के मार्गदर्शन के लिए लिखेंगी ।

प्रभात जी ...ये प्रश्न ऐसे हैं कि या तो अपनी पूरी बात लिख कर उन्हें एक दिशा या बहस में रखा जाए या फ़िर कि खुद से ही पूछ कर उनका उत्तर लिया जाए ....

अजय कुमार झा

बेनामी ने कहा…

"They are really hippocrates".

तरन्नुम जी, बहुत अच्छी तरह वि़चार पेश किये आपने, सिर्फ इतनी कृपा कीजिये, ब्लागरों की तुलना हिप्पोक्रेट से न करें. इतनी महानता के बोझ तले सब दब जायेंगे.

हिप्पोक्रेट तो ग्रीक सभ्यता के बहुत महान फिलासफर थे, वैसे उनके जैसा तो हम भी बनना चाहेंगे.

बहरहाल जो शब्द आप इस्तेमाल करना चाहती थीं शायद वो होगा hypocrite.

tarannum ने कहा…

@jha ji
my point was on one side you disclaim all print media on another side display your post on blog.these things show how kind of man you are .
why dont you come out when some one write "tum ling pakde baithi ho?
than you support him.

@mr benami
you are right .

tarannum ने कहा…

@mr jha
why dont you come out against all those people who is using abusing language against blooger ,doing personal attack.why you support all baba of blogs?

tarannum ने कहा…

@mr jha i request you kindly give good atomsphere to hindi blogging.

अजय कुमार झा ने कहा…

तरन्नुम जी इस तरह किसी की पोस्ट पर टिप्पणी प्रति टिप्पणी देकर मैं पोस्ट की दिशा को बदलने के पक्ष में कभी नहीं रहता सो इससे परहेज ही करता हूं मगर यदि जवाब न दूं तो शायद अनुचित होगा ...आपने शायद मेरी उस पोस्ट का शीर्षक ही पढा ..पूरी पोस्ट नहीं ..पढी होती तो कदाचित ये नहीं कहतीं ..अब रही बात जिस पोस्ट की विरोध का जिक्र आपने किया और अपेक्षा की है कि मैंने क्यों नहीं लिखा उसके विरोध में ...क्या ये जरूरी है कि हरेक पोस्ट का जवाब ..पक्ष प्रतिपक्ष में मैं ही दूं और क्या ये संभव है ...हां बात और बेहतर होती यदि आपने इस तरह की कोई पोस्ट लिखी होती ..सभी पाठक भी उसे पढ पाते .रही ब्लोग बाबाओं को बढावा या समर्थन की तो ..ये गफ़लत आपको क्योंकर हुई ...नहीं जानता .अब आखिरी बात ये कि हिंदी ब्लोग्गिंग को साफ़ सुथरे माहौल देने की ..तो ये तो पाठक खुद तय कर लेंगे ..कि कौन क्या कितना बांट रहा है ....अब आपको उत्तर देने नहीं आ सकूंगा ..ये इस पोस्ट के साथ ज्यादती हो जाएगी ...आप लिखिए अपनी बात पोस्ट के माध्यम से ...स्वागत है आपका ..पढना चाहेंगे हम ....शुभ विदा
अजय कुमार झा

j ने कहा…

''व्यक्ति बेहतर विचार से महान होता है।''
Not by any ranking

श्याम कोरी 'उदय' ने कहा…

व्यक्ति बेहतर विचार से महान होता है।
....सच कहा !!!

Arvind Mishra ने कहा…

अब तो कलेजा ठंडा हो जाना चाहिए !