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सोमवार, 1 दिसंबर 2008

ये तो हमारा घोर अपमान है- डॉग ग्रुप सोसाइटी

रात के १२ बजे जब अपने प्रेस से घर वापस आ रहा था, तो रास्ते में कुत्तों का वृहद् सम्मेलन देखकर ठिठक गया। विश्वास दिलाता हूं कि मैं कुत्तों की भाषा समझ सकता हूं। लेकिन दुख है कि कुत्तों की तरह बोल नहीं सकता। बहस बिलकुल सामयिक और रोचक चल रही थी।

मुद्दा नेताओं द्वारा उनके अपमान का था।

यहां नेताओं के लिपिस्टिक प्रसंग से लेकर एनएसजी के शहीद कमांडो के परिवारवालों के प्रति दी गयी टिप्पणियों पर जोरदार बहस चली। अंत में सवॆसम्मति से निंदा प्रस्ताव पारित हुआ।


प्रस्ताव - कुत्तों की वफादारी को नजरअंदाज करना कुत्तों का अपमान है। आज दुनिया के हर राष्ट्राध्यक्ष के समारोह स्थल पर पहुंचने से पहले ही कुत्ता पहुंचता है और सुरक्षा सुनिश्चित करता है। कुत्ता जिसका नमक खाता है, उसके प्रति आजीवन वफादार रहता है। वह ऐसे नेताओं से काफी ऊंचा है, जो सिफॆ स्वाथॆ और पुश्त दर पुश्त के लिए धन इकट्ठा करने के पीछे लगे रहते हैं। हम जैसे हैं, वैसे ही ठीक हैं। हम ऐसे नेताओं की घोर निंदा करते हैं, जो हमें हीन भावना से देखते हैं और हमारी तौहीन करते हैं।

भारी मन से कुत्तों के समूह द्वारा पारित प्रस्ताव सुनकर घर आया।

उद्वेलित हूं।
क्या आप कुछ कहेंगे?